https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1494766442523857 कब होंगे एक साथ चुनाव ÷

कब होंगे एक साथ चुनाव ÷

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 केंद्र सरकार ने एक देश - एक चुनाव से संबंधी 129वां संविधान विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया गया है। यह विधेयक जेपीसी को भेजा जाएगा। अगर विधेयक 2026 में पास होता है तो चुनाव आयोग को साल 2029 तक तैयारी करनी होगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि एक - देश  - चुनाव पूरी तरह लागू होने में 2024 तक का समय लग सकता है।                                                                                                                                                   'एक देश-एक चुनाव' की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने विपक्षी दलों के भारी विरोध के बीच इससे संबंधित संविधान का 129 वां संशोधन विधेयक और इससे जुड़ा एक अन्य विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश किया। तब विपक्ष ने इस बिल को तानाशाही करार देते हुए बिल को संविधान संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने की मांग की। केंद्र सरकार ने संविधान संशोधन के लिए दो तिहाई बहुमत जुटाने की चुनौती और विपक्ष की मांग के मद्देनजर दोनों विधेयकों को जेपीसी में भेजने पर हामी भर दी।


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब बिल मंत्रिमंडल में चर्चा के लिए आया था, तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे JPC भेजने की बात कही। अब दोनों विधेयक - संविधान का 129वां संशोधन और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल जेपीसी को भेजे जाएंगे।

सवाल ये है कि संसद का मौजूदा सत्र 20 दिसंबर तक है। ऐसे में संसद के इस सत्र में बिल पास नहीं होंगे। संयुक्त संसदीय समिति की मंजूरी मिलने के बाद अगर बिल संसद में बिना परिवर्तन पास हो गए तो यह कब तक अमल आएगा ।                                                                                                               जेपीसी का गठन कैसे होगा  ÷   संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। किस पार्टी के कितने सदस्‍य होंगे, यह संख्या संसद में पार्टियों की ताकत के हिसाब से तय होगी। ऐसे में सबसे बड़ी पार्टी होने से सबसे ज्यादा सदस्य और अध्यक्ष भाजपा से हो सकता है।                                                                                                                  बिल में जेपीसी की भूमिका ÷   एक देश-एक चुनाव से संबंधित आठ पेज के इस बिल में जेपीसी को अच्‍छा खासा होमवर्क करना होगा। संविधान के तीन अनुच्छेदों में परिवर्तन करने और एक नया प्रावधान जोड़ने की पेशकश की गई है। दरअसल, अनुच्छेद 82 में नया प्रावधान जोड़कर राष्ट्रपति द्वारा अपॉइंटेड तारीख पर फैसले की बात कही गई है। बता दें कि अनुच्छेद 82 जनगणना के बाद परिसीमन के बारे में है।                                                                                                   कब देंगी जेपीसी अपनी रिपोर्ट ÷  संविधान का 129वां संशोधन और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयकों को अंतिम रूप देने में करीब-करीब पूरा 2025 लग सकता है। ऐसा होता है तो ये दोनों बिल सदन में 2026 में फिर जाएंगे।

अगर विशेष बहुमत जुटाकर बिल पास करवा लिए गए तो निर्वाचन आयोग के पास 2029 की तैयारी के लिए सिर्फ दो साल साल बचेंगे। एक देश-एक चुनाव के तहत सभी राज्‍यों और पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए यह समय पर्याप्त नहीं है।                                                                                          बिल को लागू करने की क्या हेडलाइन है  ÷   नहीं, अभी तक विधेयक में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि यह कब से लागू होना है। केंद्र सरकार ने इसे लागू करने का अधिकार अपने पास रखा है। राष्ट्रपति की अधिसूचना का समय भी स्पष्ट नहीं किया है।                                                                                      बिल पास होने के बाद क्या नया होगा देश में ÷  ये सबसे अहम सवाल है कि  साल 2029 के चुनाव के बाद राष्ट्रपति अधिसूचना जारी कर लोकसभा की पहली बैठक की तारीख तय करेंगी। चुनाव होंगे और फिर पांच साल लोकसभा का फुल टर्म 2034 में पूरा होगा।

इसके साथ ही सभी विधानसभाओं का कार्यकाल पूरा मान लिया जाएगा, तब जाकर चुनाव एक साथ कराए जा सकेंगे।                                                                                   बिल को तैयार होने में कितना समय लगेगा  ÷   अगर अभी तक की प्रक्रिया देखी जाए तो बुनियादी जरूरतों के हिसाब से 2034 की टाइमलाइन मेल खाती है। चुनाव आयोग को एक देश एक चुनाव के लिए कम से कम 46 लाख ईवीएम चाहिए।

अभी चुनाव आयोग के पास सिर्फ 25 लाख मशीनें हैं। मशीनों की एक्सपायरी 15 साल है। ऐसे में दस साल में 15 लाख मशीनों की उम्र पूरी हो जाएगी। मशीनों के इंतजाम में भी 10 साल का वक्त लग सकता है।                    ✍️  MANJEET SANSANIWAL

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