GST घोटाला
खास बात यह है कि इन फर्मों में अंबाला की विश्व विख्यात साइंस इंडस्ट्री की नामी फर्मों के अलावा अन्य कारोबारी शामिल हैं। जिस क्षेत्र की यह फर्में हैं, उसके अलावा अन्य कार्यों (साइंस उपकरणों के अलावा) की खरीद फरोख्त में यह खेल किया गया।
👉 किस तरह सामने आया GST घोटाला ➡️
अब जीएसटी विभाग द्वारा 568 फर्मों का खुलासा किया गया है, जिन्होंने अरबों रुपयों का आईटीसी सरकार से हासिल किया। इस में सामने आया है कि एक ही परिवार में अलग-अलग सदस्यों के नाम से तीन-चार फर्में रजिस्टर्ड शुरू कर दी गईं। इन्हीं फर्मों में खरीद-फरोख्त का खेल किया गया और करोड़ों का आइटीसी सरकार से ले लिया। एक फर्म द्वारा सामान की फर्जी खरीद दिखाई जाती, जबकि अन्य फर्मों को सामान बेचा हुआ दिखा दिया जाता। जो फर्म जिस कार्य में काम कर रही थे, उससे अलग प्रोडक्ट की खरीद दिखाकर यह सारा खेल किया गया। इस सारे फर्जीवाड़े में इन फर्मों की बैंक डिटेल को भी खंगाला गया। जिन फर्मों को नोटिस जारी किया गया था, उन्होंने जवाब भी दिया, लेकिन जवाब से असंतुष्ट होकर विभाग ने इन सभी पर करोड़ों रुपयों का जुर्माना ठोक दिया है। 👉 118 करोड़ का GST घोटाला आया सामने ➡️ केंद्र सरकार द्वारा देश भर में जीएसटी साल 2017 में लागू किया गया था। इसके लागू होने के बाद विभिन्न राज्यों में फर्जी इनपुट क्रेडिट टैक्स बनाने के मामले सामने आए थे।
हरियाणा की बसत करे तो पहले करीब 1182 करोड़ रुपये का आइटीसी घोटाला उजागर हो चुका था, जबकि इसमें से कुछ रिकवरी भी हुई थी।
बाद में अभियान चलाया गया, जिसमें तीन वर्गों में फर्मों की लिस्ट भी बनाई गई थी। इन लिस्टों को अन्य राज्यों से साझा भी किया गया, जबकि फिजिकली भी इनको चेक किया गया था। 👉 फर्जी फर्म बनाकर किया GST घोटाला ➡️ फर्जी फर्म बनाकर आइटीसी लेने वालों पर शिकंजा कसने के लिए फिजिकल वेरिफिकेशन का नियम भी बनाया गया। पहले जहां कागजातों के आधार पर जीएसटी नंबर जारी कर दिया जाता था, वहीं ऐसे मामले सामने आने लगे, जहां यह फर्म मौजूद ही नहीं होती थी।
कागजों मं यह फर्में जीवित रहतीं। इन में कागजात भी दूसरे लोगों के इस्तेमा किए गए थे। इसके बाद नियम बनाया गया कि जीएसटी नंबर अप्लाई करने वाले व्यक्ति के ऑफिस सहित अन्य वेरिफिकेशन फिजिकली जाकर वेरिफाई करनी हैं। ✍️ मंजीत सनसनवाल 🤔