👉 इस आर्टिकल में मंगलवार व्रत क्यों रखते हैं। इस विषय पर पूरी जानकारी प्रदान करेंगे। हिन्दू धर्म में हर वार का अपना विशेष महत्व है। हर वार का धार्मिक भावनाओं से विशेष लगाव है और धार्मिक भावनाओं के साथ किसी न किसी भगवान भगवान के साथ जुड़ाव है। तो जानिए मंगलवार को व्रत क्यों रखते हैं। क्या मंगलवार व्रत कथा , विधि , आरती , मंत्र , व्रत के लाभ , व्रत में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए , व्रत में भगवान हनुमान जी को क्यों चढ़ाएं जिससे हनुमान जी खुश हो जाएं। व्रत कुछ संपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे। यह जानकारी केवल धर्म - ग्रंथों , वेद - शास्त्रों आदि माध्यमों से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रदान कि जारी है। आर्टिकल में बताई गई जानकारी सूचना मात्र के लिए है। 👉 मंगलवार की व्रत कथा ➡️
मंगलवार व्रत की कथा इस प्रकार से है। प्राचीन समय में ऋषिनगर में केशवदत्त ब्राह्मण अपनी पत्नी अंजलि के साथ रहता था। केशवदत्त को धन-संपत्ति की कोई कमी नहीं थी। सभी लोग केशवदत्त का सम्मान करते थे, लेकिन कोई संतान नहीं होने के कारण केशवदत्त बहुत चिंतित रहा करता था। पुत्र-प्राप्ति की इच्छा से दोनों पति-पत्नी प्रत्येक मंगलवार को मंदिर में जाकर हनुमानजी की पूजा करते थे। विधिवत मंगलवार का व्रत करते हुए उनलोगों को कई वर्ष बीत गए, पर उन्हें संतान की प्राप्ति नहीं हुई। केशवदत्त बहुत निराश हो गए, लेकिन उन्होंने व्रत करना नहीं छोड़ा। कुछ दिनों के पश्चात् केशवदत्त पवनपुत्र हनुमानजी की सेवा करने के लिए अपना घर-बाड़ छोड़ जंगल चला गया और उसकी धर्मपत्नी अंजलि घर में ही रहकर मंगलवार का व्रत करने लगी।इस प्रकार से दोनों पति-पत्नी पुत्र-प्राप्ति की इच्छा से मंगलवार का विधिवत व्रत करने लगे।
एक दिन अंजलि ने मंगलवार को व्रत रखा लेकिन किसी कारणवश उस दिन वह हनुमानजी को भोग नहीं लगा सकी और सूर्यास्त के बाद भूखी ही सो गई। तब उसने अगले मंगलवार को हनुमानजी को भोग लगाये बिना भोजन नहीं करने का प्रण कर लिया। छः दिन तक वह भूखी-प्यासी रही। सातवें दिन मंगलवार को अंजलि ने हनुमानजी की विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की, लेकिन तभी भूख-प्यास के कारण वह बेहोश हो गई। अंजलि की इस भक्ति को देखकर हनुमानजी प्रसन्न हो गए और उसे स्वप्न देते हुए कहा- उठो पुत्री, मैं तुम्हारी पूजा से प्रसन्न हूं और तुम्हें सुन्दर और सुयोग्य पुत्र होने का वर देता हूं। यह कहकर पवनपुत्र अंतर्धान हो गए। तब तुरंत ही अंजलि ने उठकर हनुमानजी को भोग लगाया और स्वयं भी भोजन किया।
हनुमानजी की अनुकम्पा से कुछ महीनों के बाद अंजलि ने एक सुन्दर बालक को जन्म दिया। मंगलवार को जन्म लेने के कारण उस बच्चे का नाम मंगलप्रसाद रखा गया। कुछ दिनों के बाद केशवदत्त भी घर लौट आया। उसने मंगल को देखा तो अंजलि से पूछा- यह सुन्दर बच्चा किसका है? अंजलि ने खुश होते हुए हनुमानजी के दर्शन देने और पुत्र प्राप्त होने का वरदान देने की सारी कथा सुना दी, लेकिन केशवदत्त को उसकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ। उसके मन में यह कलुषित विचार आ गया कि अंजलि ने उसके साथ विश्वासघात किया है और अपने पापों को छिपाने के लिए झूठ बोल रही है।
केशवदत्त ने उस बच्चे को मार डालने की योजना बनाई। एक दिन केशवदत्त स्नान करने के लिए कुएं पर गया, मंगल भी उसके साथ था। केशवदत्त ने मौका देखकर मंगल को कुएं में फेंक दिया और घर आकर बहाना बना दिया कि मंगल तो कुएं पर मेरे पास पहुंचा ही नहीं। केशवदत्त के इतने कहने के ठीक बाद मंगल दौड़ता हुआ घर लौट आया। केशवदत्त मंगल को देखकर बुरी तरह हैरान हो उठा। उसी रात हनुमानजी ने केशवदत्त को स्वप्न में दर्शन देते हुए कहा- तुम दोनों के मंगलवार के व्रत करने से प्रसन्न होकर पुत्रजन्म का वर मैंने प्रदान किया था, फिर तुम अपनी पत्नी को कुलटा क्यों समझते हो। उसी समय केशवदत्त ने अंजलि को जगाकर उससे क्षमा मांगते हुए स्वप्न में हनुमानजी के दर्शन देने की सारी कहानी सुनाई। केशवदत्त ने अपने बेटे को ह्रदय से लगाकर बहुत प्यार किया। उस दिन के बाद सभी आनंदपूर्वक रहने लगे।
मंगलवार का विधिवत व्रत करने से केशवदत्त और उनके परिवार के सभी कष्ट दूर हो गए। इस तरह जो स्त्री-पुरुष विधिवत रूप से मंगलवार के दिन व्रत रखते हैं और व्रतकथा सुनते हैं, अंजनिपुत्र हनुमानजी उनके सभी कष्टों को दूर करते हुए उनके घर में धन-संपत्ति का भण्डार भर देते हैं और शरीर के सभी रक्त विकार के रोग भी नष्ट हो जाते हैं। 👉 मंगलवार व्रत की विधि ➡️
मंगलवार को अंजनी पुत्र हनुमानजी का उपवास, सच्चे मन से पूजा और व्रत कथा कहने और सुनने से हनुमानजी विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी कष्ट दूर होते हैं। हनुमानजी का व्रत रखने वाले को हर मंगलवार इस कथा का पाठ करना चाहिए। हनुमानजी को पराक्रम, बल, सेवा और भक्ति के आदर्श देवता माने जाते हैं। इसी वजह से पुराणों में हनुमानजी को सकलगुणनिधान भी कहा गया है। गोस्वामी तुलसीदास ने भी लिखा है कि- ‘चारो जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा।’ इस चौपाई का अर्थ है कि हनुमानजी इकलौते ऐसे देवता हैं, जो हर युग में किसी न किसी रूप गुणों के साथ जगत के लिए संकटमोचक बनकर मौजूद रहेंगे। शास्त्रों में कहा गया है कि हनुमानजी की सेवा करने और उनका व्रत रखने से उनकी विशेष कृपा अपने भक्तों पर बनी रहती है। सोमवार व्रत कथा की संपूर्ण जानकारी जाने के लिए यहां क्लिक करें 👉 मंगलवार व्रत कथा में गाएं जाने वाली आरती ➡️ आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की
जाके बल से गिरिवर काँपे। रोग-दोष जाके निकट न झाँके
आरती कीजै…
अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई।
दे बीड़ा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाये ।
आरती कीजै…
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवन सुत वार न लाई।
लंका जारि असुर संहारे। सियाराम जी के काज सँवारे
आरती कीजै…
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे। लाये संजिवन प्राण उबारे।
पैठि पाताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे
आरती कीजै…
बाईं भुजा असुर संहारे। दाई भुजा सब सन्त उभरे ।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें। जय जय जय हनुमान उचारें
आरती कीजै…
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
जो हनुमानजी की आरती गावे। बसी बैकुंठ परम पद पावे
आरती कीजै…
लंक विध्वंस किये रघुराई। तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला कीजाके । 👉 मंगलवार व्रत में कहें जानें वाले मंत्र ➡️
1. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय अक्षिशूलपक्षशूल शिरोऽभ्यन्तर
शूलपित्तशूलब्रह्मराक्षसशूलपिशाचकुलच्छेदनं निवारय निवारय स्वाहा।
2. ओम नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय
सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा। 3. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहरणाय
सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा। 4. आदिदेव नमस्तुभ्यं सप्तसप्ते दिवाकर!
त्वं रवे तारय स्वास्मानस्मात्संसार सागरात 5. ॐ दक्षिणमुखाय पच्चमुख हनुमते करालबदनाय
नारसिंहाय ॐ हां हीं हूं हौं हः सकलभीतप्रेतदमनाय स्वाहाः।
प्रनवउं पवनकुमार खल बन पावक ग्यानधन।
जासु हृदय आगार बसिंह राम सर चाप घर।। 6. मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं कपीश्वर ।
यत्पूजितं मया देव! परिपूर्ण तदस्तु मे ।। 7. वायुपुत्र ! नमस्तुभ्यं पुष्पं सौवर्णकं प्रियम् ।
पूजयिष्यामि ते मूर्ध्नि नवरत्न – समुज्जलम् ।। 8. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय
प्रकट-पराक्रमाय महाबलाय सूर्यकोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा। 9. प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ज्ञानघन ।
जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर ॥
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम् ।
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् ॥
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम् ।
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ॥
हनुमान नमस्कार
गोष्पदीकृत वारीशं मशकीकृत राक्षसम् ।
रामायण महामाला रत्नं वन्देऽनिलात्मजम् ॥
अञ्जनानन्दनं वीरं जानकी शोकनाशनम् ।
कपीशमक्ष हन्तारं वन्दे लङ्का भयङ्करम् ॥ २॥
महा व्याकरणाम्भोधि मन्थ मानस मन्दरम् ।
कवयन्तं राम कीर्त्या हनुमन्तमुपास्महे ॥
उल्लङ्घ्य सिन्धोः सलिलं सलीलं
यः शोक वह्निं जनकात्मजायाः ।
आदाय तेनैव ददाह लङ्कां
नमामि तं प्राञ्जलिराञ्जनेयम् ॥
मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
वातात्मजं वानर यूथ-मुख्यं
श्रीराम दूतं शिरसा नमामि ॥
आञ्जनेयमतिपाटलाननं
काञ्चनाद्रि कमनीय विग्रहम् ।
पारिजात तरुमूलवासिनं
भावयामि पवमाननन्दनम् ॥
यत्र यत्र रघुनाथ-कीर्तनं
तत्र तत्र कृत-मस्तकाञ्जलिम् ।
बाष्प-वारि-परिपूर्ण-लोचनं
मारुतिर्नमत राक्षसान्तकम् ॥ 10. मर्कटेश महोत्साह सर्वशोक विनाशन ।
शत्रून संहर मां रक्षा श्रियं दापय मे प्रभो।। 👉 मंगलवार के व्रत रखने के लाभ ➡️ 1. इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।
2. जातक और उसके परिवार को हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।
3. विधिपूर्वक व्रत करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
4. भूत-प्रेत और नकारत्मक शक्तियों से छुटकारा मिलता है।
5. व्रत का उद्यापन करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
6. जीवन में शक्ति और सभी तरह के कार्यों में सफलता मिलती है।
7. करियर और कारोबार में मन मुताबिक सफलता मिलती है। 👉 मंगलवार के व्रत में क्या बरतें सावधानियां ➡️ 1. मंगलवार के व्रत में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
2. इस व्रत में ब्रह्मचर्य का पालन करें। शारीरिक संबंध न बनाएं।
3. पूजा के दौरान मन को बिल्कुल शांत रखने की कोशिश करें।
4. इस व्रत में नमक का सेवन नहीं किया जाता है।
5. मंगलवार व्रत के दौरान काले या सफेद वस्त्र पहनकर हनुमान जी की पूजा नहीं करें।
6. मंगलवार का व्रत में एक बार भोजन करते हैं। 👉 मंगलवार के व्रत में क्या खाना चाहिए ➡️ यदि आप मंगलवा के दिन व्रत करते हैं, तो इस दिन शाम के समय घी में बनी हुई पूरी खा सकते हैं। इसके साथ ही मंगलवार व्रत में गुड़ का सेवन करना भी अच्छा माना जाता है। इसके साथ आप फलाहार कर सकते हैं और दूध का सेवन भी कर सकते हैं। मंगलवार के दिन शाम के समय अपना व्रत खोलने के बाद आप बेसन का लड्डू भी खा सकते हैं। कोशिश करें कि व्रत पूरा होने पर एकदम सादा आहार लें. इसमें दही, खीरा, सेब, कम घी में बने आलू, साबूदाना की खिचड़ी या खीर, सवां के चावल की खीर या खिचड़ी, कुट्टू के आटे की रोटियां, लौकी की बनी कोई सादा मिठाई या कालीमिर्च और सेंधे नमक में उबालकर हल्की फ्राई की हुई लौकी आदि खा सकते हैं। 👉 मंगलवार के व्रत में भगवान हनुमान जी को क्या चढ़ाना चाहिए ➡️ 1. बूंदी का भोग
बजरंगबली हनुमान जी को बूंदी का भोग विशेष रूप चढ़ाया जाता है। यह उसके प्रिय भोगों में से एक है। ऐसे में मंगलवार के दिन हनुमान जी को बूंदी का भोग जरूर लगाना चाहिए। इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और सभी अपने भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
2. बेसन के लड्डू
बूंदी के अलावा हनुमान जी को बेसन से बने लड्डू भी बेहद पसंद हैं। कहा जाता है यदि आपकी कोई मनोकामना पूरी नहीं हो रही है तो, हनुमान जी को मंगलवार के दिन बेसन से बने लड्डू का भोग लगाना चाहिए। इससे सभी मनोकामनाएं जल्द पूरी हो जाती हैं।
3.गुड़ और चने का भोग
बजरंगबली को गुड़ और चने का भोग अत्यंत प्रिय है। आप हनुमान जी को मंगलवार और शनिवार के दिन गुड़ चने का भोग लगा सकते हैं। इससे वह प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर समस्या को हर लेते हैं। 4. पान का बीड़ा
ऐसा माना जाता है कि पान का बीड़ा अर्पित करने से भगवान आपके हर महत्वपूर्ण कार्य का दायित्व अपने ऊपर ले लेते हैं। मंगलवार के दिन पूजा पाठ के बाद हनुमान जी को बनारसी पान का बीड़ा अर्पित करना सर्वोत्तम माना जाता है। 👉 इस आर्टिकल में निहित किसी भी जानकारी , सामग्री , गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों , ज्योतिषियों , पंचांग , प्रवचनों , मान्यताओं , धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।' ✍️ मंजीत सनसनवाल 🤔