देव उठनी एकादशी व्रत की संपूर्ण जानकारी
👉 देव उठनी एकादशी के व्रत में भगवान श्री हरि की पूजा की जाती है। देव उठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु निंद मुद्रा से जागृत होते हैं। देव उठनी एकादशी के दिन व्रत और भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा - पाढ करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा होती है। देवउत्थान एकादशी, जो दिवाली के तुरंत बाद आती है, आज 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाया जा रहा है। पवित्र वेद-पुराणों के अनुसार, इस दिन देवताओं की नींद समाप्त होती है। इस दिन से चतुर्मास का समापन होता है, जिसके फलस्वरूप सभी प्रकार के शुभ कार्य जैसे मुंडन संस्कार, विवाह, गृह-प्रवेश आदि का आरंभ किया जाता है। इस दिन एक विशेष कथा का पाठ किया जाता है। तो चलिए देव उठनी एकादशी व्रत की संपूर्ण जानकारी क्या है जानते हैं। देव उठनी एकादशी व्रत की कथा क्या है। देव उठनी एकादशी व्रत की पूजा विधि क्या है। देव उठनी एकादशी 2025 में कब है। देव उठनी एकादशी के कितने व्रत करने चाहिए। देव उठनी एकादशी व्रत में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। देव उठनी एकादशी में पूजा के दौरान कौन से मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए। देव उठनी एकादशी व्रत में पूजा के दौरान कौन सी आरती करनी चाहिए। देव उठनी एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए। देव उठनी एकादशी व्रत क्या नहीं खाना चाहिए। देव उठनी एकादशी के व्रत रखने से क्या लाभ होता है। देव उठनी एकादशी व्रतों का उद्यापन कैसे करना चाहिए।
1.देव उठनी एकादशी व्रत की कथा ➡️
देव उठनी एकादशी को कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसे देवोत्थान एकादशी , देव उठनी ग्यारस , प्रबोधिनी एकादशी अन्य नामों से भी जाना जाता है।
देव उठनी एकादशी के दिन राजा के राज्य में सभी लोग एकादशी का व्रत रखते थे। राजा से लेकर प्रजा तथा नौकर - चाकरों से लेकर पशुओं तक को एकादशी के दिन अन्न नहीं दिया जाता था।
किसी दूसरे राज्य का व्यक्ति राजा के महल में आकर बोला ये राजन् ! मेहरबानी करके आप मुझे नौकरी देने का कष्ट करें । राजा ने उसकी बात मान ली । परन्तु राजा ने उसके सामने एक शर्त रखी कि खानें को सब कुछ मिलेगा परन्तु एकादशी के दिन केवल फलाहार मिलेगा अन्न नहीं मिलेगा।
उस समय उस व्यक्ति ने शर्त मान ली , किन्तु एकादशी के दिन जब उस व्यक्ति के सामने खानें के लिए फलाहार का सामना दिया गया तो वह राजा के पास जाकर रोने लगा और बोला महाराज इससे फलाहार से मेरा पेट नहीं भरेगा। कृपया करके मुझे खानें को अन्न दो नहीं तो मैं भूखा ही भर जाऊंगा।
उस व्यक्ति के ज्यादा ज़िद करने पर राजा ने उस वह शर्त बताई। राजा के बार - बार मना करने पर भी वह नहीं माना तो उसे अन्न आदि दिया गया। फिर हर रोज की तरह वह नदी पर पहुंचा। स्नान आदि करके के बाद खाना बनाने लगाया। खाना बन कर तैयार हो गया तो भगवान को भोग लगाकर पुकारने लगा।
अगली एकादशी प्रदंह दिन बाद वह व्यक्ति राजा के पास गया और कहने लगा की महाराज , मुझे इस एकादशी पर दुगुना सामान देना नहीं तो मैं एकादशी के दिन भूखा भर जाऊंगा। राजा ने इस सब का कारण पूछा तो उसने बताया कि हमारे साथ भगवान भी खाते हैं। इसीलिए हम दोनों के लिए ये सामान पूरा नहीं होता। उसके बुलाने पर भगवान विष्णु पीताम्बर धारण किए हुए चतुर्भुज रूप में आ गए तथा आदर सहित उसके साथ भोजन खाना। भोजन करने के बाद भगवान अंतर्धान हो गए । वह वहां से महल चला आया। फिर आने वाली पंद्रह दिन बाद एकादशी पर वह व्यक्ति राजा को बोला महाराज मुझे इस एकादशी पर दुगुना सामान देना। उस एकादशी पर मैं भूखा ही रह गया। कारण पूछने पर राजा को बताया कि हमारे साथ भगवान भी खाते हैं। इसीलिए हम दोनों के लिए ये सामान पूरा नहीं होता।
राजा की बात सुनकर वह व्यक्ति बोला महाराज ! यदि आप को यकीन नहीं होता है तो आप स्वयं चलकर देख लों। राजा उस व्यक्ति की बात मानकर एक पेड़ के पिछे बैठ कर सब कुछ देख ने लगा । तो उस व्यक्ति ने नदी में स्नान आदि करने के बाद खाना बनाया और भगवान को भोग लगाकर शाम तक बार - भगवान विष्णु से विनती करता रहा है । परंतु भगवान न आए। अंत में उसने कहा- हे भगवान ! यदि आप नहीं आए तो मैं नदी में कूदकर अपनी जान दें दुंगा।
किन्तु भगवान विष्णु के नहीं आने पर जब वह व्यक्ति अपनी जान देने के लिए नदी में छलांग लगाने को तैयार हुआ तो भगवान विष्णु उस व्यक्ति की दृढ़ इच्छा को देखें कर प्रकट हो कर उसे रोक लिया और साथ बैठकर भोजन करने लगे। खा-पीकर वे उसे अपने विमान में बिठाकर अपने धाम ले गए।
यह सब देख कर राजा को समक्ष आ गया कि व्रत उपवास सब का तब तक कोई लाभ नहीं है जब तक मन शुद्ध ना हो। इससे राजा को ज्ञान मिला। वह भी मन से व्रत-उपवास करने लगा और अंत में स्वर्ग को प्राप्त हुआ।
2.देव उठनी एकादशी के व्रत की पूजा विधि क्या है ➡️
1.पूजा विधि:-
1. व्रत संकल्प:-
1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
2. ॐ नारायणाय विद्महे , वासुदेवाय धीमहि, तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्" मंत्र का जाप करें।
2. कलश स्थापना एवं पूजन:-
1. एक लकड़ी की चौकी पर विष्णु जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
2. पास में कलश स्थापित करें और उस पर नारियल रखें।
3. भगवान विष्णु का पूजन:-
1. तुलसी पत्र, फूल, धूप, दीप, रोली, चंदन, पंचामृत से विष्णु जी का पूजन करें।
2. भगवान को फल, मिठाई, पंचामृत और नैवेद्य अर्पित करें।
3. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।
4. देव जागरण एवं तुलसी विवाह:-
1. शाम को दीप जलाकर भगवान विष्णु की आरती करें।
2. कुछ स्थानों पर इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी होता है, जिसमें तुलसी माता का विवाह शालिग्राम रूपी विष्णु जी से संपन्न कराया जाता है।
5. व्रत कथा श्रवण:-
1 देव उठनी एकादशी की कथा सुनें या पढ़ें।
6. भजन-कीर्तन एवं जागरण:-
1. रात में भजन-कीर्तन करें और भगवान विष्णु के नाम का संकीर्तन करें।
7. द्वादशी को पारण :-
1. अगले दिन (द्वादशी) को ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें।
2. स्वयं सात्विक भोजन ग्रहण करें।
विशेष: - इस दिन तुलसी जी के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है, इसलिए पूजा में तुलसी पत्ता अवश्य चढ़ाएं।
3. देव उठनी एकादशी का व्रत 2025 में कब है ➡️
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देव उठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी) का व्रत हर साल किया जाता है। लेकिन यदि आप यह जानना चाहते हैं कि जीवन में कुल कितने व्रत करने चाहिए, तो यह व्यक्ति की श्रद्धा और संकल्प पर निर्भर करता है।
सामान्य रूप से व्रत रखने के नियम:-
नियमित व्रत: – हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को व्रत करें।
संकल्प अनुसार :– कुछ लोग 12 वर्षों तक लगातार यह व्रत रखते हैं, क्योंकि यह विष्णु जी की कृपा प्राप्त करने का विशेष साधन माना जाता है।
उत्सव स्वरूप :– कई लोग जीवनभर इस व्रत को करते हैं और इसे एक शुभ अनुष्ठान के रूप में मानते हैं।
5. देव उठनी एकादशी व्रत में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए ➡️
देव उठनी एकादशी के व्रत में कुछ विशेष सावधानियों का पालन करना आवश्यक होता है ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
1. शुद्धता और नियमों का पालन करें :- व्रत रखने वाले व्यक्ति को ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।
1. घर एवं पूजा स्थान की सफाई करें और शुद्ध वातावरण बनाए रखें।
2. सात्त्विक भोजन ग्रहण करें :-
1.यदि व्रत में फलाहार कर रहे हैं, तो फल, दूध, मेवे और फलाहारी व्यंजन खाएं।
2. अनाज, चावल, दाल, लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से परहेज करें।
2. सेंधा नमक का प्रयोग करें, साधारण नमक न खाएं।
3. तले-भुने और अधिक मिर्च-मसाले वाले भोजन से बचें।
3. मन और वाणी पर संयम रखें :-
1. इस दिन क्रोध, कटु वचन, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए।
2. अधिक समय भगवान विष्णु की भक्ति, मंत्र जाप और ध्यान में लगाएं।
4. व्रत तोड़ने के नियमों का पालन करें :-
1. अगले दिन प्रातः स्नान कर व्रत का पारण करें।
2. ब्राह्मणों को भोजन कराकर या जरूरतमंदों को दान देकर व्रत पूर्ण करें।
5. शुभ कार्यों की शुरुआत करें :-
1. यह दिन विशेष रूप से शुभ होता है, इसलिए विवाह, गृहप्रवेश, नए कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं।
2. तुलसी विवाह का आयोजन भी इसी दिन किया जाता है, इसे विधिपूर्वक करें।
इन सावधानियों का पालन करने से व्रत का संपूर्ण लाभ प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
6.देव उठनी एकादशी व्रत में पूजा के दौरान कौन - से मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए ➡️
अ देव उठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी) के दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस दिन निम्न मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है :-
1. श्री विष्णु ध्यान मंत्र
पूजा शुरू करने से पहले भगवान विष्णु का ध्यान करें :-
शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं।
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयंन योगिभिर्ध्यानगम्यम्।
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।
2. देव उठनी एकादशी व्रत संकल्प मंत्र
व्रत का संकल्प लेने के लिए:
ममोपात्त समस्त दुरितक्षयद्वारा श्री परमेश्वर प्रीत्यर्थं।
श्रीविष्णो :- प्रबोधिनी एकादशी व्रतमहं करिष्ये।
3. भगवान विष्णु मूल मंत्र
पूजा के दौरान बार-बार इस मंत्र का जाप करें:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
4. श्री हरि स्तुति मंत्र
भगवान विष्णु की स्तुति के लिए :-
कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा।
बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात्।
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै।
नारायणायेति समर्पयामि।।
5. श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र
अगर संभव हो तो विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या निम्न श्लोक बोलें :-
श्रीरामं रामभद्रं च रामचन्द्रं च गच्छति।
रघुनाथं दशरथात्मजं श्रीरामं वसुदेव सुतं नमामि।।"
6. तुलसी पूजन मंत्र
देव उठनी एकादशी के दिन तुलसी माता की भी पूजा होती है :-
"ॐ तुलस्यै नमः।"
इन मंत्रों के साथ भगवान विष्णु को पंचामृत, पुष्प तुलसी दल, धूप-दीप, और नैवेद्य अर्पित करें और पूरी श्रद्धा से पूजा करें।
7.देव उठनी एकादशी व्रत में पूजा के दौरान कोन सी आरती करनी चाहिए ➡️
देव उठनी (प्रबोधिनी) एकादशी व्रत पूजा के दौरान भगवान विष्णु की आरती करना शुभ माना जाता है। इस दिन मुख्य रूप से निम्नलिखित आरती की जाती है :-
श्री हरि विष्णु जी की आरती
ॐ जय जगदीश हरे
सब जनों के संकट , दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे॥
जो ध्यान लगावें फल पावे , दु :ख जिनसे मन का
स्वामी दु :ख जिनसे मन का , सु :ख सप्पति घर आवें।।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।
स्वामी शरण गहुं किसी , तुम बिन और कोई न दुजा।।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
स्वामी तुम अंतर्यामी, पारब्रह्म परमेश्वर॥
अन्य आरतियां :-
1. शालिग्राम जी की आरती
2. तुलसी माता की आरती (क्योंकि इस दिन तुलसी विवाह भी होता है)
3. लक्ष्मी जी की आरती (भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा होती है)
आप अपनी श्रद्धा और भक्ति के अनुसार इन आरतियों में से कोई भी कर सकते हैं।
8. देव उठनी एकादशी के व्रत में क्या खाना चाहिए ➡️
देव उठनी एकादशी व्रत में सात्विक और फलाहारी भोजन किया जाता है। व्रत के दौरान इन चीजों का सेवन किया जा सकता है:
अनुमति योग्य खाद्य पदार्थ :-
फल – केला, सेब, अनार, अंगूर, नारियल, पपीता आदि।
सूखे मेवे – बादाम, किशमिश, अखरोट, काजू, मखाना आदि।
दूध और दूध से बने उत्पाद – दूध, दही, छाछ, पनीर, मावा।
अनाज (वैकल्पिक) – सामक चावल, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, राजगिरा।
साबूदाना – साबूदाने की खिचड़ी, खीर या वड़ा।
गुड़ और शहद – मिठास के लिए सफेद चीनी की बजाय गुड़ या शहद का उपयोग करें।
नमक – व्रत में सेंधा नमक का ही प्रयोग करें।
शाकाहारी व्रत व्यंजन – आलू की सब्जी, लौकी, कद्दू, अरबी आदि की सब्जी बिना लहसुन-प्याज के बनाई जा सकती है।
मौसमी पेय – नारियल पानी, फलों का जूस, नींबू पानी।
9. देव उठनी एकादशी व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए ➡️
देव उठनी एकादशी के व्रत में कुछ चीजें वर्जित मानी जाती हैं। व्रत के दौरान निम्नलिखित चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए: -
1. अनाज और दालें चावल, गेहूं, जौ, दालें आदि का सेवन निषेध होता है।
2. लहसुन और प्याज सात्त्विक भोजन करना चाहिए, इसलिए तामसिक चीजें वर्जित होती हैं।
3. मसालेदार और तली-भुनी चीजें व्रत के नियमों के अनुसार हल्का और शुद्ध भोजन करना चाहिए।
4. नमक का अधिक सेवन व्रत में सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है, साधारण नमक नहीं।
5. मांसाहारी भोजन और शराब व्रत में मांसाहार और नशीले पदार्थों का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है।
6. अधिक तेलयुक्त भोजन शरीर को हल्का और शुद्ध रखने के लिए साधारण फलाहार या उबले भोजन का सेवन करना चाहिए।
7. तामसिक और गरिष्ठ भोजन
8. अत्यधिक भारी भोजन से व्रत का प्रभाव कम हो सकता है।
व्रत में फल, दूध, सूखे मेवे, साबुदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, मूंगफली आदि का सेवन किया जा सकता है।
10. देव उठनी एकादशी के व्रत रखने के क्या लाभ हैं ➡️
देव उठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी) का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। यह कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है और इसे भगवान विष्णु के चार महीने के योगनिद्रा से जागने का दिन माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से कई लाभ होते हैं, जैसे :-
1. आध्यात्मिक लाभ :-
1. इस दिन व्रत और पूजा-पाठ करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
2. यह व्रत मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है और पापों का नाश करता है।
3.चतुर्मास (चार महीने की भक्ति साधना) का समापन इसी दिन होता है, जिससे यह अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
2. पारिवारिक एवं सांसारिक लाभ :-
1. इस दिन व्रत रखने से दांपत्य जीवन सुखमय होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
2. जिन लोगों की शादी में बाधा आ रही हो, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
3. इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है, जिससे वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
3. स्वास्थ्य एवं मानसिक लाभ :-
1. एकादशी व्रत करने से शरीर की शुद्धि होती है और पाचन तंत्र को आराम मिलता है।
2. मानसिक शांति और ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है।
4. आर्थिक लाभ :-
1. इस दिन पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
2. धन-धान्य की वृद्धि होती है और व्यापार में सफलता प्राप्त होती है।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम के पाठ, दान-पुण्य, और तुलसी विवाह करने से विशेष फल मिलता है।
11. देव उठनी एकादशी व्रतों का उद्यापन कैसे करना चाहिए ➡️
देव उठनी (प्रबोधिनी) एकादशी व्रत का उद्यापन करते समय कुछ विशेष विधियों का पालन किया जाता है। यदि आपने यह व्रत नियमित रूप से रखा है और अब इसका विधिपूर्वक उद्यापन करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित चरणों का पालन करें :-
1. उद्यापन का संकल्प लें
व्रती को प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। फिर भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए संकल्प लें कि वे विधिपूर्वक व्रत का उद्यापन करेंगे।
2. कलश स्थापना करें
एक वेदी पर स्वच्छ पीला वस्त्र बिछाकर उस पर तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें। कलश में गंगाजल, सुपारी, दूर्वा, पंचरत्न एवं सिक्का डालें। कलश के ऊपर नारियल रखें।
3. भगवान विष्णु की पूजा करें
भगवान विष्णु की शालिग्राम शिला या मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और गंगाजल) से स्नान कराएं। उन्हें पीले वस्त्र, तुलसीदल, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें।
4. कथा वाचन करें
देव उठनी एकादशी व्रत की कथा का श्रवण एवं वाचन करें। कथा समाप्त होने के बाद सभी उपस्थित लोगों को तुलसी जल और प्रसाद वितरित करें।
5. ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं
उद्यापन के दिन गरीबों, ब्राह्मणों, साधु-संतों और जरूरतमंदों को भोजन कराना चाहिए। भोजन में खीर, पूड़ी, सब्जी आदि का भोग लगाएं।
6. दान-पुण्य करें
ब्राह्मणों को वस्त्र, अन्न, धन, दक्षिणा, फल, मिट्टी के बर्तन, तिल, गुड़ आदि दान करें। तुलसी का पौधा, श्रीमद्भगवद्गीता और अन्य धार्मिक ग्रंथों का भी दान करना शुभ माना जाता है।
7. व्रत खोलें
सभी धार्मिक अनुष्ठानों के बाद व्रती स्वयं भोजन करें और व्रत खोलें। इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए।
8. भगवान को प्रणाम कर आशीर्वाद लें
अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लेकर उद्यापन को पूर्ण करें।
इस विधि से देव उठनी एकादशी व्रत का उद्यापन करने से पुण्य लाभ प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा सदैव बनी रहती है।
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