बलूचिस्तान में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने जाफर ट्रेन एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया और सैकड़ों यात्रियों को बंधक बना लिया। हाल ही मे पड़ोसी मुल्क ने चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी की थी। हालांकि टीम इंडिया ने सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान न जाने का फैसला किया।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हाईजैक हुए जाफर ट्रेन एक्सप्रेस की चर्चा दुनियाभर में हो रही है। नौ डिब्बों वाली जाफर एक्सप्रेस करीब 500 यात्रियों को लेकर सुबह 9 बजे क्वेटा से पेशावर के लिए निकली थी। दोपहर को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने इस ट्रेन को हाईजैक कर लिया था। बीएलए का दावा है कि 154 से ज्यादा लोग अभी भी उनके बंधक हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में पाकिस्तान ने चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी की थी। हालांकि, सुरक्षा कारणों की वजह से भारतीय टीम ने पड़ोसी मुल्क का दौरा नहीं किया। भारत के इस फैसले पर PCB ने खूब हाय तौबा मचाया, लेकिन इस घटना ने दुनिया को बता दिया कि आतंकवाद ग्रस्त देश में जाकर न खेलने का निर्णय कितना सही था।
बलूचिस्तान प्रांत में कितने क्रिकेट स्टेडियम हैं?
हालांकि, आइए आज जरा जान लें कि बलूचिस्तान प्रांत में कितने इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम हैं और वहां कितने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच हुए हैं। वहीं, टीम इंडिया ने वहां कितने मैच खेले हैं।
दरअसल, बलूचिस्तान में दो क्रिकेट स्टेडियम हैं। पहला अयूब नेशनल स्टेडियम और दूसरा बुगती स्टेडियम है। इन दो स्टेडियम में इंटरनेशनल मैच कराए जाते हैं। वहीं, एक ग्वादर क्रिकेट स्टेडियम भी है। हालांकि, यहां अभी तक एक भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच नहीं हुआ।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अयूब नेशनल स्टेडियम और दूसरा बुगती स्टेडियम में कुल मिलाकर अब तक सिर्फ 3 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले गए हैं। अयूब नेशन स्टेडियम में दो वनडे और बुगती स्टेडियम में एक वनडे मुकाबला हुआ है।
टीम इंडिया ने बलूचिस्तान में दो मुकाबले खेले
आइए अब जानते हैं कि भारतीय टीम ने कब बलूचिस्तान प्रांत में जाकर क्रिकेट खेला। टीम इंडिया ने यहां दो वनडे मैच खेले हैं। पहला मैच 1 अक्टूबर 1978 को पाकिस्तान के खिलाफ अयूब स्टेडियम में हुआ था। बिशन सिंह बेदी की कप्तानी में टीम इंडिया ने मैच खेला और 4 रनों से जीत हासिल की थी।
इसके अलावा 12 अक्टूबर 1994 को भारतीय टीम ने दूसरा मुकाबला भी अयूब नेशनल स्टेडियम में ही खेला। सुनील गावस्कर ने इस मैच में कप्तानी की थी। हालांकि, इस मैच में मेजबान टीम पाकिस्तान ने 46 रनों से मैच जीत लिया था।
हैरानी की बात ये है कि साल 1996 के बाद बलूचिस्तान प्रांत में कोई अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं कराया गया है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान की सरकार ने किस तरह बलूचिस्तान प्रांत को दरकिनार कर रखा है।
वहां के लोगों के लिए पाकिस्तान की सरकार अन्य प्रांत के मुकाबले ज्यादा ध्यान नहीं देती, जिसकी वजह से वहां के लोग पाकिस्तान सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहते हैं। बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले लोगों को वहां की सरकार आतंकवादी करार दे देती है।
✍️ मंजीत सनसनवाल 🤔